Showing posts with label sangeet. Show all posts
Showing posts with label sangeet. Show all posts

Saturday, April 12, 2014

Jeevan Sangeet

जीवन है संगीत।
सुर है मन के मीत।

पर्वत के फैले आँचल में
निर्झर के कल कल में
सागर की लहरों के जल में
कर्ण प्रिय सुर सिंगार प्रतीत।।

पूरव से चली पुरवाई
मदमस्त पवन सुखदाई
इठलाती बरखा आई
मेघ मल्हार करे वशीभूत।।

कृपा करो हे वीणा वादिनी
मुखरित कर दो राग रागिनी
श्याम मेघ में दमके दामिनी
रिम झिम सावन सा संगीत।।

मनमोहन मुरली बजाये
मन भावन रास रचाये
नटवर माया नटी नचाये
कहते इसे अलौकिक प्रीत ।।

जय महादेव डमरूधारी
रुद वीणा सर्जक उपकारी
शिव नटराज प्रलयकारी
नाद ब्रह्म पुनीत ।।

अनंत सुख जीवन की चाह
अंतस से निकले सुर प्रवाह
बड़ी कठिन साधक की राह
तप तपके मिलती जीत।।

सब सधे मंजे हैं सुर ताल
लय पकडे अपनी सही चाल
सच्ची लगन व संगीत का कमाल
मधुर धुन नहीं होती कालातीत।।


--
रूपेंद्र अलमस्त
बिलासपुर , छत्तीसगढ़