मेरे देश के लोगों जागो नव भविष्य बनाना है ।
स्वतंत्रा सम्पूर्ण अर्थ में इस भारत में लाना है ।
पतित पावनी गंगा बहती पर्वतराज हिमालय
सागर इसके चरण पखारे भारत माता की जय
रंग बिरंगे इन फूलों का सचमुच एक ह्रदय
राष्ट्रप्रेम का दीप जलाके मावस से टकराना है ।
रामकृष्ण जहाँ पे खेले वो विशाल ये आंगन
ऊपर धरती सोना उगले नीचे छुपा विपुल धन
कर्म छेत्र में शंख फूकता भगवद् गीता दर्शन
आत्म शांति के महादेश में दुख दरिद्र हटाना है।
हाथ हाथ को काम मिले भूखे पेट को रोटी
स्वतंत्रता का सही अर्थ में यही एक कसौटी
अवसर के दरवाजे खोलो किस्मत रहे ना खोटी
समृद्धि के जीवन पथ पे श्रम का जोर लगाना है।
विश्व शांति का दीपक देश महान ठहरा
अखिल विश्व पर छाया जिसका अमिट प्रभाव गहरा
परिवर्तन की आंधी को मौका मिले सुनहरा
काल चक्र के साथ चलें राह पे स्वर्ण बिछाना है।
मंदिर में बज रही घंटियां मस्जिद में अजान हुई
गुरुद्वारे में गुरबानी गिरजा में प्रेम पहचान हुई
राह अनेक लक्ष्य एक बात हमें ये भान हुई
सबसे बड़ा है धर्म राष्ट्र हित जीवन में अपनाना है।
--
रूपेंद्र अलमस्त
बिलासपुर , छत्तीसगढ़
स्वतंत्रा सम्पूर्ण अर्थ में इस भारत में लाना है ।
पतित पावनी गंगा बहती पर्वतराज हिमालय
सागर इसके चरण पखारे भारत माता की जय
रंग बिरंगे इन फूलों का सचमुच एक ह्रदय
राष्ट्रप्रेम का दीप जलाके मावस से टकराना है ।
रामकृष्ण जहाँ पे खेले वो विशाल ये आंगन
ऊपर धरती सोना उगले नीचे छुपा विपुल धन
कर्म छेत्र में शंख फूकता भगवद् गीता दर्शन
आत्म शांति के महादेश में दुख दरिद्र हटाना है।
हाथ हाथ को काम मिले भूखे पेट को रोटी
स्वतंत्रता का सही अर्थ में यही एक कसौटी
अवसर के दरवाजे खोलो किस्मत रहे ना खोटी
समृद्धि के जीवन पथ पे श्रम का जोर लगाना है।
विश्व शांति का दीपक देश महान ठहरा
अखिल विश्व पर छाया जिसका अमिट प्रभाव गहरा
परिवर्तन की आंधी को मौका मिले सुनहरा
काल चक्र के साथ चलें राह पे स्वर्ण बिछाना है।
मंदिर में बज रही घंटियां मस्जिद में अजान हुई
गुरुद्वारे में गुरबानी गिरजा में प्रेम पहचान हुई
राह अनेक लक्ष्य एक बात हमें ये भान हुई
सबसे बड़ा है धर्म राष्ट्र हित जीवन में अपनाना है।
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रूपेंद्र अलमस्त
बिलासपुर , छत्तीसगढ़
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